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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
बोड़ो लोकगीतों का अनुशीलन
Authors
जयन्त कुमार बोरो
Abstract
किसी भी समाज में लोकगीत का विशेष महत्व रखता है। भारत के इतिहास में यह देखने को मिलता है कि देश के समाजिक एवं सास्कृतिक वातावरण में लोकगीत की क्या भूमिका रही हैं। लोरगीत एक समुदाय की मौखिक साहित्य का मूलाधार है। लोकसाहित्य में किसी वर्ग अथवा समुदाय के भाव एवं सामाजिक चेतना के इतिहास को अवलोकन किया जा सकता है। बोड़ो असम प्रांत की सबसे प्राचीन जनजाति में से एक हैं। यह जनजाति पूरे असम प्रान्त मे फैला हुआ है। इस जनजाति की अपनी परम्परा, रीति आदि प्राचीन काल से चली आ रही है। इनकी कुछ प्राचीन परम्परायें लोकगीतों के माध्यम से मुखरित हुई हैं। बोड़ो लोकगीतों को मूल्यांकन के दृष्टकोण से विविध श्रेणियों में विभक्त कर इसका अनुशीलन किया जा सकता हैं। जैसे- (क) राष्ट्रभक्ति, (ख) समाजिक, (ग) रोमान्टिक, (घ) धार्मिक – 1- प्रार्थनात्मक, 2. उपदेशात्मक, 3. आध्यात्मिक, (भ) बालगीत, (च) विवाह गीत इत्यादि।
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Pages:760-770
How to cite this article:
जयन्त कुमार बोरो "बोड़ो लोकगीतों का अनुशीलन". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 760-770
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