ARCHIVES
VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
प्राचीन भारत में मृत्तिका शिल्प
Authors
उमेश कुमार
Abstract
एक को अनेक रूप देना ही शिल्प है अर्थात् विभिन्न कलाएं जो मुख्य रूप से हाथों से रूपांकित होती हैं हस्त शिल्प कही जाती हैं। इसका निर्माण करने वाला श्ल्पिकार कहा जाता है। प्राचीन ग्रन्थों में कला और शिल्प को एक ही विद्या के अंतर्गत माना गया है लेकिन वैदिक साहित्य में उनकी पृथक-पृथक उक्ति भी मिलती है। देवताओं केे प्रधान शिल्पी विश्वकर्मा को शिल्पवतानवद और कला विदमावर दोनों की कहा गया है। शिल्प विद्या के अंतर्गत मृदभाण्ड-शिल्प, काष्ठ शिल्प, वस्त्र शिल्प, मूर्तिकला, वास्तु शिल्प,चित्र शिल्प, उद्यान शिल्प, यंत्र शिल्प प्रभृति आदि अनेक शिल्पों का समावेश होता है। प्राचीन भारत में शिल्पकला को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता था।
Download
Pages:838-840
How to cite this article:
उमेश कुमार "प्राचीन भारत में मृत्तिका शिल्प". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 838-840
Download Author Certificate
Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.
