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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
कबीर का जीवन-दर्शन
Authors
डाॅ. पूनम काजल
Abstract
कबीरदास मध्यकालीन निर्गुण साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र हैं, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है। तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक व्यवस्था से असन्तुष्ट होकर उन्होंने अत्यन्त निर्भीकतापूर्वक तत्कालीन जड़ सामाजिक व धार्मिक परम्पराओं के उन्मूलन का स्तुत्य प्रयास किया। निःसन्देह उनकी वाणी सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्यों की संवाहक है। उनकी गणना उत्तर भारत के भक्ति आन्दोलन के अग्रणी कवियों में की जाती है। वे एक ऐसे युगचेता कवि थे, जिन्होंने वर्णाश्रम व्यवस्था की अंधविश्वासपूर्ण तर्कहीनता को अनावृत्त कर समाज का पथ-प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तत्कालीन मिथ्या रूढ़ियों व धार्मिक व्यवस्थाओं पर तीव्र प्रहार किए। वे निराश हिन्दू जनता के लिए आशा की ज्योति लेकर आए। सही अर्थाें में वे सर्वहितकारी, मानवतावादी व परम समदर्शी सन्त थे।
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Pages:1146-1147
How to cite this article:
डाॅ. पूनम काजल "कबीर का जीवन-दर्शन". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 1146-1147
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