Logo
International Journal of
Academic Research and Development

Search

ARCHIVES
2025 ISSUES
VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
हठप्रदीपिका व धेरण्ड संहिता आदि ग्रन्थों में प्राणायाम का महात्मय
Authors
भतेरी देवी
Abstract
योग का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। योग करने से हमारी मानसिक तथा शारीरिक सभी प्रकार की बीमारियाँ ठीक होती है। योग का अर्थ है जोड़ना। जीवात्मा का परमात्मा से मिलन योग है। योग को करने के बहुत लाभ होते हैं। महर्षि पतंजलि ने अण्टांग योग के आठ अंगों का वर्णन किया है। जब यम, नियम की साधना सफल हो जाती है तब आसन को करना चाहिए। आसन करने से शरीर में दृढ़ता आती है। इसके बाद प्राणायाम आता है। प्राणायाम से जीवनी शक्ति का विस्तार होता है।
Download
Pages:686-689
How to cite this article:
भतेरी देवी "हठप्रदीपिका व धेरण्ड संहिता आदि ग्रन्थों में प्राणायाम का महात्मय". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 686-689
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.