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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
भारत में आपदा प्रबंधन
Authors
अंकित सिंह
Abstract
भारत की गणना उन राष्ट्रों में होती है जो प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है। असाधारण उपमहाद्वीपीय आयाम, भौगोलिक स्थिति और मानसून का स्वरूप, भारत को विश्व के सबसे अधिक खतरा-प्रवण देशों की पंक्ति में ला खड़ा करते हैं। यह हिमालय क्षेत्र में होने वाली भूस्खलनी हिमघावी के अलावा, सूखे, बाढ़, चक्रवातों और भूकम्पीय घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। प्रत्येक वर्ष इन परिघटनाओं से हजारों जाने जाती हैं और कई लाखों की सम्पŸिा नष्ट हो जाती है। सभी आपदाओं के सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सम्बन्धी परिणाम होते हैं हालाॅकि प्रत्येक पर इन परिणामों की मात्रा में अन्तर होता है। काफी समय से भारत में आपदा प्रबंधन मुख्य समस्या रही है परन्तु नीति-मुद्दे के रूप में इसे दशक (1990-2000) में महत्व मिला। इस दशक को 1989 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय प्राकृतिक आपदा अल्पीकरण दशक घोषित किया गया था। यह अनुभव किया गया कि आपदा प्रबंधन सतत् राष्ट्रीय आवश्यकता है और प्राकृतिक खतरों और आर्थिक विकास पर उनके प्रभावों द्वारा उत्पन्न, राष्ट्रीय पर्यावरण पर बढ़ते हुए खतरों के कारण आज इसका विशेष महत्व हैं।
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Pages:1071-1072
How to cite this article:
अंकित सिंह "भारत में आपदा प्रबंधन". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 1071-1072
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