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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की तलाश: सखारोव के विशेष संदर्भ में
Authors
डॉ0 शंभू जोशी
Abstract
आंद्रेई दिमित्रीविच सखारोव रूसी परमाणु भौतिकशास्त्री और रूसी मानवाधिकार आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे। शीतयुद्ध के समय में सोवियत रूस में रहते हुए विज्ञान को राजनीतिक मतवाद (State Doctrine) से मुक्त रखने तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर बल दिया। 1968 में अपनी प्रसिद्ध रचना “Reflection of Progress, Peaceful Co- existence and Intellectual Freedom” में पूर्व-पश्चिम सहयोग, नागरिक स्वतंत्रताओं पर जोर तथा हथियारों की प्रतिस्पर्धा बंद करने की वकालत की । 1975 में नोबल शांति पुरस्कार प्राप्त सखारोव ने आणविक निःशस्त्रीकरण और मानवाधिकार हनन के प्रति लगातार आवाज को मुखर किया। शीतयुद्ध के संकट पूर्ण समय में उन्होंने समस्त मानवता को एक मानकर अपना चिंतन प्रस्तुत किया। तात्कालिक विश्व के सामने प्रस्तुत जिन चुनौतियों का जिक्र सखारोव ने किया कमोबेश वह आज भी हमारे सामने खड़ी हैं। एक आशावादी विचारक होने के नाते सखारोव ने शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की प्राप्ति का एक व्यावहारिक विकल्प भी बताया जो आज भी हमारे लिए आवश्यक है। एकध्रुवीय विश्व एवं लगातार हिंसक होते समय में एक शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के आधार पर विश्व के नवनिर्माण की संरचना करते हुए हमें सखारोव से अवश्य गुजरना होगा।
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Pages:1073-1075
How to cite this article:
डॉ0 शंभू जोशी "शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की तलाश: सखारोव के विशेष संदर्भ में". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 1073-1075
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