Logo
International Journal of
Academic Research and Development

Search

ARCHIVES
2025 ISSUES
VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
निराला की कविता में दलित-चेतना
Authors
Renu
Abstract
निराला का काव्य जीवन के श्रेष्ठतम् मूल्यों से अनुप्राणित हैं। निराला ने समाज में पीडित, शोषित, दलित लोगों का वर्णन किया है। वे शोषकों पर व्यंग्य कसते हैं तथा शोषितों के प्रति सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने विधवाओं की पीडा को समझा है तथा वे उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं। वे अपनी कविता ष्वह तोडती पत्थर में मजदूर स्त्री का बडा मर्मस्पषी चित्रण करते हैं। उनकी लेखनी ने जातिवाद तथा संप्रदायवाद पर तीक्ष्ण प्रहार किया है। अतः यह कहा जा सकता है कि निराला की कविताओं में दलितों का उत्पीड़न सर्वत्र उपलब्ध हैं। वे उनके प्रति सहानुभूति तथा संवेदना रखते हैं। संक्षित रुप से निराला को एक विद्रोही कवि भी कहा जा सकता है।
Download
Pages:999-1000
How to cite this article:
Renu "निराला की कविता में दलित-चेतना". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 999-1000
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.