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VOL. 2, ISSUE 5 (2017)
हिन्दी भाषा : उत्पत्ति और विकास
Authors
किरण मयी
Abstract
संसार का सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद है। ऋग्वेद से पहले भी संभव है कोई भाषा विद्यमान रही हो परन्तु आज तक उसका कोई लिखित रूप नहीं प्राप्त हो पाया। हिन्दी का विकास क्रम-संस्कृत-पालि-प्राकृत-अपभ्रंश-अवहट्ठ-प्राचीन/प्रारम्भिक हिन्दी है।
संस्कृतकालीन आधारभूत बोलचाल की भाषा परिवर्तित होते-होते 500 ई.पू. के बाद तक काफी बदल गई, जिसे ‘पाली’ कहा गया। महात्मा बुद्ध के समय में पाली लोक भाषा थी और उन्हांेने पाली के द्वारा ही अपने उपदेशों का प्रचार-प्रसार किया। संभवतः यह भाषा ईसा की प्रथम ईसवी तक रही। पहली ईसवी तक आते-आते पालि भाषा और परिवर्तित हुई, तब इसे प्राकृत की संज्ञा दी गई। इसका काल पहली ई0 से 500 ई0 तक है। आगे चलकर, प्राकृत भाषाओं के क्षेत्रीय रूपों में अपभ्रंश भाषाएँ प्रतिष्ठित हुई। इनका समय 500 ई0 से 1000 ई0 तक माना जाता है। अपभ्रंश भाषा साहित्य के मुख्यतः दो रूप मिलते है- पश्चिमी और पूर्वी। अनुमानतः 1000 ई0 के आसपास अपभ्रंश के विभिन्न क्षेत्रीय रूपों से आधुनिक आर्य भाषाओं का जन्म हुआ। हिन्दी में साहित्य रचना का कार्य 1150 या इसके बाद आंरभ हुआ।
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Pages:960-961
How to cite this article:
किरण मयी "हिन्दी भाषा : उत्पत्ति और विकास". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 5, 2017, Pages 960-961
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