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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रभाव का शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा स्तर का अध्ययन
Authors
डाॅं. अरुण कुमार ओझा
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र रीवा जिले में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रभाव का शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा स्तर का अध्ययन पर आधारित है। संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने भारत के संविधान में अंतःस्थापित अनुच्छेद 21-क,ऐसे ढंग से जैसाकि राज्य कानून द्वारा निर्धारित करता है, मौलिक अधिकार के रूप में छः से चैदह वर्ष के आयु समूह में सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 में बच्चों का अधिकार, जो अनुच्छेद 21 क के तहत परिणामी विधान का प्रतिनिधित्व करता है, का अर्थ है कि औपचारिक विद्यालय, जो कतिपय अनिवार्य मानदण्डों और मानकों को पूरा करता है, में संतोषजनक और एकसमान गुणवत्ता वाली पूर्णकालिक प्रारंभिक शिक्षा के लिए प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। शोध अध्ययन से ज्ञात होता है कि अनुसंधान के परिणामांे से प्राप्त निष्कर्ष के आधार पर यह ज्ञात हुआ कि शोध क्षेत्र में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के कारण शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में प्रारम्भिक शिक्षा स्तर पर छात्रों के नामांकन दर में वृद्धि हुई है। शहरी क्षेत्र का नामांकन दर ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा कुछ अधिक है, किन्तु बहुत अधिक नहीं है। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है, कि शोध क्षेत्र में इस अभियान के कारण शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा स्तर पर नामांकन दर में कोई सार्थक अन्तर नही है।
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Pages:688-691
How to cite this article:
डाॅं. अरुण कुमार ओझा "शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रभाव का शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा स्तर का अध्ययन". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 688-691
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