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VOL. 2, ISSUE 3 (2017)
प्रेमचन्द के कथा साहित्य में लोक चेतना
Authors
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी
Abstract
प्रेमचन्द का कथा साहित्य अत्यन्त विशाल है ‘पंच परमेश्वर’ से प्रारम्भ यात्रा का समापन ‘कफन’ में होता है। इस सम्पूर्ण यात्रा के दोनों बिन्दुओं पर ध्यान देने से यह स्पष्ट हो जाता है कि जो व्यक्ति पंच परमेश्वर के उच्च आदर्शों को लेकर अपना साहित्य प्रारम्भ करता है वह कफन जैसे नग्न यथार्थ का चित्रण कैसे कर पाया होगा। उपन्यासों में गोदान तक आते-आते बहुत कुछ ‘कफन’ की विचाराधारा पुष्ट हो जाती है।
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Pages:379-380
How to cite this article:
डाॅ0 जयराम त्रिपाठी "प्रेमचन्द के कथा साहित्य में लोक चेतना". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 3, 2017, Pages 379-380
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